पधारो म्हारी माता, अब घट में विराजो । भगत थारा आया, अब किरपा बरसाओ ॥ तो हु बैजानु सरत मय सुरत कर । पन सवरु रे घर वोसो ज्ञाने बताय ॥ तो हु बैजानु हरीया सा गोबर कुंता घोली । पन दीज्यो री मोतिरारा चवक पुराय ॥ तो हु बैजानु कलश भर्या गंगाजल का । पन भरिया री ज्योत जगाई दिन रात ॥ तो हु बैजानु लाल चुनरी म्हारी अबला । ओढाजो री अबला भेंट लीजो नारियल का ॥ तो हु बैजानु हार मंगाजो फुलान का । मंगाजो री अबला भोग लगाजो फुलडान का ॥ तो हु बैजानु संकट हरजो म्हारी दुर्गा । पन हरजो री चरणो मे अपनाओ म्हारी दुर्गा ॥ तो हु बैजानु थारा बिना कोन सुने बिनती । पन सुनियो रे तु ही सुने म्हारी आरजी ॥ तो हु बैजानु दास थारा गाया नव राता । परदेसी गावे शरम राखजो म्हारी अबला ॥